देहरादून। प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा को और मजबूत करते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। समग्र शिक्षा योजना के तहत प्रदेश के 544 नए विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे, जिसे भारत सरकार से स्वीकृति मिल गई है। इन विद्यालयों में छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक और तकनीकी कौशल से भी लैस किया जाएगा, जिससे वे भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के लिए सक्षम बन सकें।
विद्यालयी शिक्षा विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप राज्य में व्यावसायिक शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र से चयनित विद्यालयों में 8 व्यावसायिक क्षेत्रों—एग्रीकल्चर, ऑटोमोटिव, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, आईटी, प्लंबिंग, रिटेल और टूरिज्म एवं हॉस्पिटैलिटी—में प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये विषय उत्तराखंड बोर्ड और सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल हैं और विद्यालय स्तर पर एक विषय के रूप में पढ़ाए जाएंगे।
कक्षा 10 और 12 उत्तीर्ण छात्रों को नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (NSQF) के अंतर्गत क्रमशः लेवल-3 और लेवल-4 के दक्षता प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। व्यावसायिक शिक्षा के संचालन के लिए पीएसएससीआईवीई के मानकों के अनुरूप 548 प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं तथा अनुभवी प्रशिक्षकों की तैनाती की जा रही है।
वर्तमान में प्रदेश के 531 विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं, जिनमें 50,903 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इसके अतिरिक्त 28 हब एंड स्पोक विद्यालयों में भी 973 विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। हाल ही में आयोजित राज्य स्तरीय जॉब फेयर में कक्षा 12 के प्रथम बैच के 146 छात्रों को विभिन्न कंपनियों से कैंपस प्लेसमेंट भी मिला है।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ व्यावसायिक रूप से भी सशक्त बनाना है, ताकि युवा पीढ़ी आत्मनिर्भर बन सके। इसी दिशा में 544 और विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं और इसके लिए सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

